[VIDEO] आयुर्वेद में भाँग का महत्त्व | Cannabis And Ayurveda | Priya Mishra | Hemp | WeedOnTV | Cannab0s | Info News

आयुर्वेद में भाँग का महत्त्व | Cannabis And Ayurveda | Priya Mishra | Hemp

Video by : Sangam Talks – 2 sept. 2019

In ancient civilizations like Greece, China, Egypt etc. and in religions like Judaism, Tao, Buddhism, Sikh and Islam, a plant called Ganja or cannabis has been given great importance and has been used as a medicine.However, the oldest references to Ganja are found in India. In Sanatan Dharma, Ganja is said to be the prasad of Lord Shiva and in ancient Ayurveda system of India it is considered as nectar. In the Atharva Veda it is described as one of the 5 holiest flora of the earth and it has been given more than 150 names like Indrasana, Vijaya, Ajay etc. It is mentioned in Ayurvedic texts like Sushruta Samhita, in which its medicinal properties have been analyzed. Hemp or cannabis has been used as a basic chemical in many Ayurvedic medicines.What was the reason that such miraculous and useful vegetation, which our ancestors offered as an offering to their dearest God, was banned in his native land, India? When and who imposed these restrictions? Why even after opposing this ban for 40 years, Ganja was declared illegal in India? Learn in this creation lecture of Ms. Priya Mishra.Today, when numerous countries of the world have declared it legal due to the medical-oriented, industrial and environmental-related utility of Ganja, why is it still prohibited in India? Why misconceptions and misconceptions are spread in Indian civil society and its use is considered inappropriate?

यूनान, चीन, मिस्र आदि प्राचीन सभ्यताओं में तथा यहूदी, ताओ, बौद्ध, सिख व इस्लाम जैसे धर्मों में गांजा या भांग नामक वनस्पति को बहुत महत्व दिया गया है और इसका प्रयोग औषधि के रूप में किया जाता रहा है|

तथापि गांजा के सबसे पुरातन उल्लेख भारत में मिलते हैं| सनातन धर्म में गांजा को भगवान शिव का प्रसाद बताया गया है तथा भारत की प्राचीन आयुर्वेद पद्धति में इसे अमृततुल्य माना गया है| अथर्व वेद में इसे पृथ्वी की ५ सबसे पवित्र वनस्पतियों में से एक बताया गया है तथा इसे १५० से अधिक नाम दिए गए हैं जैसे इन्द्रासन, विजया, अजय इत्यादि| सुश्रुत संहिता जैसे आयुर्वेदिक ग्रंथों में इसका उल्लेख मिलता है, जिनमें इसके औषधीय गुणों का विश्लेषण किया गया है| कई आयुर्वेदिक औषधियों में गांजा या भांग का मौलिक रसायन के रूप में प्रयोग किया जाता रहा है|

क्या कारण थे की ऐसी चमत्कारिक व उपयोगी वनस्पति पर, जिसे हमारे पूर्वज अपने सबसे प्रिय भगवान को चढ़ावे के रूप में अर्पण किया करते थे, उसी की मूल धरती, भारत में प्रतिबन्ध लगा दिए गए? कब और किसने लगाये ये प्रतिबन्ध? क्यों ७० वर्षों तक इस प्रतिबन्ध का विरोध करने के बाद भी भारत में गांजा को अवैध घोषित कर दिया गया? जानिए सुश्री प्रिया मिश्र के इस सृजन व्याख्यान में|

आज जब विश्व के असंख्य देश गांजा की चिकित्सा-प्रधान, औद्योगिक तथा पर्यावरण-सम्बन्धी उपयोगिता के कारणवश इसे वैध घोषित कर चुके हैं, क्यों भारत में आज भी इसका निषेध है? क्यों भारतीय सभ्य समाज में इसके प्रति भ्रांतियां व मिथ्या धारणाएं फैली हुई हैं और इसका उपयोग अनुचित माना जाता है?